Tuesday, April 29, 2008

सपने आँखोमे ही टूट गए

सपने आँखोमे ही टूट गए
टूटे हुए सपनों के शीशे अब इन आँखोमे चुबने लगे
महोब्बत की शायद यही सिला थी
दुनिया भर की नफ़रत वें अब हम से करने लग

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