Tuesday, April 29, 2008

जिंदगी के किताब को आज खोलके देखा तो कुछ पन्नोंको खाली पाया

जिंदगी के किताब को आज खोलके देखा तो कुछ पन्नोंको खाली पाया
हाँ ये सोचके खाली रखा था के कोई इसपे महोब्बत का दास्तान लिखेगा
खाली था बस खाली ही रह गया!

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