Thursday, May 08, 2008

जो कभी हकीक़त बनते ही नहीं वो ख्वाब सजते क्यों है

जो कभी हकीक़त बनते ही नहीं वो ख्वाब सजते क्यों है
किसीको देखके दिल के धड़कने बड़ते क्यों है
वो दूर से दिल के इतने करीब आता क्यों है
जो कभी अपने बन ही नहीं सकते महोब्बत के वो फूल खिलते ही क्यों है


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